*पुष्प की अभिलाषा पूर्ण होते हुए..*
चाह नहीं मैं सुरबाला के
गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं, प्रेमी-माला में
बिंध प्यारी को ललचाऊँ,
चाह नहीं, सम्राटों के शव
पर हे हरि, डाला जाऊँ,
चाह नहीं, देवों के सिर पर
चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ।
मुझे तोड़ लेना वनमाली!
उस पथ पर देना तुम फेंक,
मातृभूमि पर शीश चढ़ाने
जिस पर जावें वीर अनेक
- माखनलाल चतुर्वेदी
भारतीय सैन्य अकादमी से उत्तीर्ण युवा अधिकारियों के ऊपर पुष्प वर्षा होते हुए | |
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| News & Politics | Upload TimePublished on 9 Jun 2018 |
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